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Showing posts from June 4, 2011

वक़्त का दरिया

कितना वक़्त  खोया  मैंने , खोने  को  और  पाने  को , काश  की  ये  वक़्त  मिल  जाता , फिर  से  मुझे  बिताने  को  ...

फ़रियाद  किया ,याद  किया , कितना  वक़्त  बर्बाद  किया ,
हँसा -रोया -गाया , पर  आवाज़  नहीं  पहुंची  मेरी ,
जाता  रहा  मूरत  के  आगे  घंटी  मगर  बजाने  को ..

जज्बातों  की  तपिश  में  चमका  करता  था ,
एक  हलकी  सी  बारिश  में  सब  कुछ  बह  गया ,
किसने कहा  था  मुझे , रेत  का  घर  बनाने  को ..

कभी  रिश्तों  का  नाम  दिया  था  जिनको  मैंने ,
आज  सब  किश्तों  में  अदा  करता  जाता  हूँ  मैं ,
मेरे  बदले  कौन आएगा  मेरा  क़र्ज़  चुकाने  को ..

अभिनेता हूँ  जो  हर  पल  अभिनय  करता  हूँ ,
ये हसी, ठिठोली, रंग, उल्लास रित जीवन ,
एक मुखौटा भर जीता हूँ , दुनिया  को  दिखाने  को ..

पूरा  करती  तुम  मुझे  तो  कोई  बात  भी  थी ,
पूरी  बात  ये  है  की  तुम  मेरा  अधूरापन  हो ,
मैं  तुम्हारी  ओर  आता  हूँ , बस  वापस  लौट  जाने  को ..

उसने  जो  पूछा , 'लिखने  का  वक़्त  मिल  जाता  है ',
लिखने  के  लिए  सांस  तो  कई सारे  लेते  है ,
मैं  लिखता  हूँ  मगर , सांस  ले  पाने  को ..

ये  गयी…